Wednesday, 31 May 2017

अक्षरों में एहसास के पल

हंसमुख स्वभाव की थी नवधा और उसके पति संयम भी उसी के स्वभाव के जैसे थे | दोनों पति-पत्नी को कहानी, कविताओं, शेरो-शायरी का बहुत शौक़ था, नवधा तो कभी-कभार कहानियां-कविताएं आदि भी लिखा करती जिसके पहले पाठक अक्सर उसके पति ही हुआ करते , नवधा को बचपन से ही लिखने का शौक़ रहा इसलिए वो अपने विवाह के पहले जब भी कुछ लिखा करती तो सबसे छुपा कर अपने माता-पिता, भाई-बहनों को पढ़ाया करती थी, नवधा का परिवार उसके लेखन को सराहता, और भी बेहतरीन लिखने को हमेशा प्रेरित भी किया करता, शादी के बाद उसके ससुराल में भी किसी को उसके लेखन के शौक पर कोई आपत्ति नहीं थी|
    विवाह के बाद कुछ दिनों तक तो नवधा का लेखन का हुनर छिप-सा गया था मगर परिवार वालों की इच्छा के अनुसार और अपने कुछ ख़ास दोस्तों का दिल रखने के लिए नवधा ने समय निकाल कर फिर से लेखनी थामी | एक दिन नवधा अपने रोज़मर्रा के काम-काज़ निपटा रही थी कि आलमारी साफ़ करते समय उसके हाथों में उसके पति की एक पुरानी डायरी लगी तो वो उसके पन्ने पलटने लगी, बीच में गुलाबी स्याही से लिखी प्यार भरी तहरीर पढ़ कर वो सोचने लगी कि ये क्या है , क्या उसके पति की विवाह से पहले कोई प्रेमिका भी रही है ?, लेकिन अपने स्वभाव के अनुरूप नवधा ने वो डायरी उसी तरह वहीं ज्यों कि त्यों रख दी |
   नवधा और संयम की जोड़ी उनके आपसी समझ के कारण बड़ी मशहूर थी, ऊपर से दोनों का एक जैसा स्वभाव भी बहुत लोगों की ईर्ष्या का कारण रहा हमेशा ही, मगर इन सबसे उन दोनों के आपसी  रिश्ते में   कोई खटास नहीं आने पाई कभी | नवधा बहुत सुशील , गुणवान और रूपवान थी जिसके कारण कई बार लोग उसे अपने प्रेम जाल में फसाने को बड़े बेताब हुए लेकिन नवधा पूरी तरह से अपने पति और परिवार को ही समर्पित थी अतः उसके सामने किसी की दाल गलने नहीं पाई  जो कि नवधा के चरित्र के बारे में तरह - तरह की अफवाहों की जन्मदायक भी हुई मगर इन सबसे उसे या उसके परिवार को फ़र्क तो नहीं पड़ता बस कभी-कभी सब उलझ जरूर जाते थे|
   पहले प्यार का एहसास सभी को आजीवन याद रहता है मगर समय के साथ-साथ अपने प्यार को संवारते रहना और परवान चढ़ते देख सन्तोष होना तो कोई नवधा के पति संयम से सीखे  | शाम के वक्त संयम आलमारी में कुछ खोज़ रहा था  उसे परेशान देख नवधा ने पति की मदद करनी चाही तभी वही पुरानी डायरी ज़मीन पर गिर पड़ी |
  नवधा और संयम के बीच में उस पुरानी डायरी के वही पन्ने खुले हुए थे जिसे पढ़ कर नवधा ने उस दिन चुपचाप रख दिया था | खुले हुए पन्नों में पहले प्यार की दास्तान के रुपहले अक्षर अपने एहसास की खुश्बू में भीगे हुए मुस्करा रहे थे कि हड़बड़ाहट में संयम और नवधा दोनों ही डायरी उठाने को झुके और आपस में सिर लड़ा बैठे | "सॉरी", संयम ने कहा तो नवधा बोली कि "क्यों सॉरी", | संयम इसके आगे कुछ बोल न सका , तभी नवधा डायरी के उन्हीं पन्नों को फिर पढ़ने लगी तो संयम ने कहा-" प्लीज़ , आप इसे न पढ़िए," नवधा मुस्कराई -" क्यों न पढूँ मैं इसे, बताइये तो" नवधा को शरारत से मुस्कराते देख संयम शरमाते हुए बोला कि -" ये सब तो बहुत पहले मैंने आपके लिए ही लिखा था और आज ख़ुद आपने ही इसे पढ़ लिया "|

संयम की बात सुन कर नवधा अवाक - सी संयम को देखती ही रह गयी, और संयम के होठों पर विजयी मुस्कान खिल उठी | 
------------------ नीरु ( निरुपमा मिश्रा त्रिवेदी) 
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