Sunday, 5 June 2016

अर्धनारीश्वर

सामर्थ्य
सृजनशक्ति
पुरुष और प्रकृति,
आँखें देखती
बाहर तो
अकेलापन
अधूरापन,
अपने भीतर
झांके
पहचाने
तो एकांत
विवेक-बुद्धि
सद्बुद्धि,
मनन
मन
नमन,
शक्ति का प्रयोजन
अधूरा
जब तक नही है
शिवम्,
सारतत्व यही जीवन का
सत्यम्, शिवम्,सुंदरम्
जगत- ईश्वर
अर्धनारीश्वर,
वसुधैव कुटुम्बकम्
- निरुपमा मिश्रा ( नीरू)